प्राशासनिक आदेश के बावजूद निजी अस्पताल की नहीं रूक रही है मनमानी

प्राशासनिक आदेश के बावजूद निजी अस्पताल में नहीं रूक रहा है मनमानी

कोरोनावायरस के आलम में हजारीबाग मेडिकल कॉलेज अस्पताल के द्वारा ओपीडी चलाने का जिम्मा एक निजी अस्पताल को दिया गया है । सरकार लाख कोशिश कर ले लेकिन निजी अस्पताल अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहें हैं ...

हजारीबाग मेडिकल कॉलेज अस्पताल के द्वारा सर्जरी और ऑर्थोपेडिक का ओपीडी हजारीबाग के पेलावल स्थित लाइफ केयर अस्पताल में संचालित कराई गई है ।  हजारीबाग के सिविल सर्जन ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि ₹10 का मात्र रसीद कटाया जाएगा जिसके बाद आयुष्मान का लाभ मिलेगा एवं भर्ती होने वाले मरीजों को सरकारी कीमत पर ही पैसे भुगतान किए जाएंगे लेकिन अस्पताल का आलम कुछ और बता रहा है । सिविल सर्जन ने स्पष्ट तौर पर यह भी कहा कि निजी अस्पतालों की मनमानी नहीं चलेगी सर्जरी भी सरकारी रेट पर ही किए जाएंगे।

अस्पताल में मरीजों का क्या हाल है इसका इसकी बानगी आप खुद ही देख सकते हैं एक मरीज जो टूटे हुए  हाथ का इलाज कराने आया था उसके एक्सरे करने के पैसे तो लिए ही गए साथ ही प्लास्टर करने के नाम पर भी उससे ₹2000 की मांग रखी गई जबकि उक्त मरीज के पास अपना आयुष्मान कार्ड भी है ऐसे में पैसे नहीं लिए जाने की बात खोखली साबित हो रही है ।

इसके अलावा आप देखें कि एक पिता अपनी बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचा है जिसके साथ क्या-क्या हो रहा है सबसे पहले बच्ची के पिता से खून जांच के नाम पर पैसे लिए जाते हैं फिर ग्लव्स के नाम पर पैसे लिए जाते हैं और तो और दो बोतल सलाइन में से भी एक बोतल सलाइन परिचारिका के द्वारा ले लिए जाते हैं । वही अस्पताल में चिकित्सकों की कमी देखने को मिल रही है जिसके कारण मरीज बेहाल नजर आ रहा है ।

 एक ओर कोरोनावायरस का खतरा मंडरा रहा है तो दूसरी ओर अन्य बीमारियों से त्रस्त लोगों का इस तरह दोहन किया जाए तो इसका क्या जवाब होगा । ऐसे में निजी अस्पतालों के ऊपर विश्वास कर सरकार ने उन्हें जो जिम्मेवारी सौंपी है उसे भली भांति नहीं निभा रहे हैं, जरूरत है इस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की ।

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