अप्रैल 2010 : सरकार ने कहा नक्सली भी हमारे लोग; मारे गए CRPF के 76 जवान.. संख्या बढ़ती रही...

वर्ष 2010 में नक्सलियों का आतंक चरम पर था। जवानों के पास आधुनिक शस्त्र ना होने के कारण और सरकार द्वारा खुले तौर पर कार्य करने की आजादी ना होने के कारण देश के 76 जवानों ने अपनी जान गवा दी। इस घटना ने 76 जवानों के परिवार को बुरी तरह से झकझोर कर रख दिया । कई परिवार बुरी तरह से बिखर गए। देश में यह सबसे बड़ी घटना सीआरपीएफ पर घटित हुई थी। 
आपको बता दें, की 6 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ में घात लगाकर बैठे 1000 नक्सलियों ने सुरक्षा बल के जवानों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया था। दंतेवाड़ा जिले के ताड़मेटला में नक्सलियों ने एंबुश लगाकर सीआरपीएफ के 76 जवानों को अपना निशाना बनाया था। इस घटना ने छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश को झंकझोर कर रख दिया था। देश के भीतर सीआरपीएफ पर अब तक का ये सबसे बड़ा हमला बताया जाता है।

6 अप्रैल की सुबह दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में सीआरपीएफ के करीब 150 जवान सर्चिंग के लिए निकले थे। आमतौर पर सर्चिंग से वापस लौटते वक्त जवान थके हुए होते हैं। इसी का फायदा उठाते हुए करीब 1000 नक्सलियों ने जवानों के वापस लौटने के रास्ते में एंबुश लगाया था। जैसे ही जवान पहुंचे नक्सलियों ने जोरदार धमाका कर दिया, इससे पहले कि जवान कुछ समझ पाते नक्सली उन पर अंधाधुंध फायरिंग करने लगे।

दंतेवाड़ा में कई घंटों तक चली इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे और 8 नक्सली मारे गए थे। 

CRPF पर हुए इस बड़े हमले के बाद राजनीति कुछ दिन तक काफी गर्म रही । उस वक्त कांग्रेस सरकार के रक्षा मंत्री डॉ पी चिदंबरम की सरकार सत्ता में थी । 
खुफिया नक्सलियों द्वारा कही गई बात जिसकी आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हो पाई। छत्तीसगढ़ के स्थानीय नेताओं का फुल सपोर्ट नक्सलियों को था। आर्थिक सहायता से लेकर शस्त्र बल से योग्य थे सभी नक्सली।

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