लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे प्रवासी मजदूरों का हुजूम उतरा सड़को पर

लॉकडाउन में अफवाहों की वैसे वजह से सड़कों पर उतरे प्रवासी मजदूरों


#कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए जहां सरकार लॉकडाउन की राह सुनिश्चित कर लागू कर रही है। वही अपने घर-द्वार  को छोड़ हजारों किलोमीटर दूर दूसरे राज्यों में रोजी-रोटी कमाने गए प्रवासी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है। काम ना होने के कारण इन प्रवासी मजदूरों को अपने घर की चिंता सताने लगी।


3 मई तक बढ़ाया गया लॉकडाउन

सरकार की सख्ती के बावजूद दिल्ली, मुंबई सहित देश के महानगरों और महाराष्ट्र के कई शहरों से इन मजदूरों के पलायन की खबरें आती रही। कोई चोरी छिपे तो कोई पैदल ही अपने घर के लिए निकल पड़ा। वही देशभर में 3 मई तक लॉकडाउन को आगे बढ़ाए जाने के बाद प्रवासी मजदूर लॉकडाउन को लंबा खिंचता देख घबरा गए और घर जाने की मांग करने लगे.

अब नहीं कर सकते इंतजार

मुंबई के बांद्रा स्टेशन के बाहर हजारों की तादाद में जमा हुए ये सभी मजदूर लॉकडाउन की वजह से अपने घरों में या शेल्टर होम में मौजूद थे। उन्हें भरोसा था कि लॉकडाउन 14 अप्रैल को खत्म हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ‌। ऐसे में परेशानियों के बीच उनके सब्र का बांध टूट गया और घरों से बाहर निकल वे अपने गांव जाने की मांग करने लगे।


कोरोना से बुरी तरह प्रभावित मुंबई में इस कदर भीड़ का उमड़ना काफी डराने वाला है.बांद्रा में इतने सारे लोगों के सड़क पर आने से कोरोना के फैलने का खतरा बढ़ गया है. .प्रवासी कामगारों के बीच इस बात की आशंका है कि लॉकडाउन अगर लंबा खींचा तो उनके भूखे मरने की नौबत आ जाएगी. वही सरकारी सिस्टम पर वे भरोसा नही कर पा रहे और उनके सब्र का बांध टूट रहा है.

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